गेहू के रोगों की पहचान और नियंत्रण

नमस्कार दोस्तों आज का यह आर्टिकल बाकी आर्टिकल से अलग है| जैसा की आप ही जानते है भारत एक कृषि प्रधान देश है|और अभी उत्तर भारत में गेहू की फसल की बुआई की हुई है|इसमें बहुत ही ऐसे रोग होते है वो गेहू के फसल में लग जाते है|इसी पर आधारित हमने आज का यह आर्टिकल गेहू के रोगों की पहचान और नियंत्रण के बारे में विस्तार से बात करने वाले है| अगर आप भी एक कृषक है या कृषक परिवार से सम्बंधित है तो आपसे अनुरोध है की आप इस आर्टिकल को अंत तक जरुर पाहे|

दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको गेहू के कौन-कौन से रोग होते है और उनके क्या-क्या उपचार हो सकते है| और फिर हम आपको इससे सम्बंधित सारी जानकारी विस्तार से समझायेंगे|

गेहू की फसल

उत्तर भारत ही नही, लगभग सम्पूर्ण भारत मेंगेहू को खाद्यान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है| ऐसे में फसल में कुछ ऐसे रोग लग जाते है जिनसे रोकथाम करना है जरूरी है| नही तो गेहू का उत्पादन कम हो जाएगा| इसलिए इन फसल के रोगों को पहचान कर कीटनाशक का छडकाव करके प्रति रोधक क्षमता बढ़ा सके| इसी को ध्यान में रखते हुए हमने आज का यह आर्टिकल आपको जानकारी देने के लिए बनाया है

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गेहू की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग

गेहू की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग व्याख्या सहित निम्न है|

गेहू का पिला रतुआ या धारीधार रतुआ

जैसा की नाम से पता चलता है की यह रोग गेहू की फसल में लगता है तब पहले फसल पर पीले रंग की धारिया देखने को मिलती है| और इस रोग के अंतिम समय में पत्तियाँ पिली होकर शूखकर निचे गिर जाती है|इस पीले रंग को स्थिति को गेहू का पीला रतुआ कहते है|यह रोग सामान्यतया पक्सीनिया स्ट्राईफार्मिस नामक कवक के कारण होता है|

  • क्षेत्र – यह रोग मुख्यतया कम तापमान वाले इलाको में होता है| जैसे हिमालय पहाड़िया और उतरी मैदान क्षेत्र में ज्यादा फैलता है|
  • रोकथाम – उन्नत प्रतिरोधी किस्मो की कीटनाशक का इस्तेमाल करके इस रोग से बचा जा सकता है| मेन्कोजेब 75 WP लगभग 2 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव किया जाता है|
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2. गेहू का पर्ण रतुआ / भूरा रतुआ

  • दोस्तों यह हवा से फैलने वाला संक्रामक फसली रोग है जो पक्सीनिया रिकोन्दिता ट्रीटीसाईं नामक कवक से फैलता है|
  • क्षेत्र – लगभग सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है परन्तु हिमालय और दक्षिण भारत में निलगिरी पहाडियों में फैलता है|
  • रोग की पहचान –इस रोग का पहचान करना ज्यादा मुश्किल नही है जब यह रोग लगने लगता है तब गेहू की पत्तियों का रंग नारंगी रंगों के गेहू की पत्तियों पर उभरता है| अगर वक्त रहते रोकथाम नही किया जाए तो यह लगभग पूरी फसल को नष्ट कर सकता है|
  • रोकथाम –  आप नजदीकी कृषि सम्बंधित सामान की दूकान पर से प्रोपीकोनेजोल का छिडकाव कर सकते है|

3.गेहू का तना रतुआ या काला रतुआ

  • उत्तर भारत में यह रोग गेहू की फसल के पकते समय में होता है जो पक्सीनिय ग्रामिनिस त्रीतिसाई नामक कवक के  कारण फैलता है| यह रोग मुख्यतया नगण्य है क्योंकि जब फसल पक जाती है तब लगता है|

निष्कर्ष

आज के इस आर्टिकल में हमने गेहू के रोगोंकी पहचान और उसके रोकथाम और उपचार कैसे करते है उसके बारे में विस्तार से  बताया है| मैं आशा करता हु की आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा, अगर पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ साझा जरू करे|

अगर आपको इससे सम्बंधित किसी भी तरह की समस्या है तो आप हमी सूचित कर सकते है हम आपकी समस्या का समाधान जरुर करेंगे|

अगर आप हमे कुछ सुझाव देना चाहते है तो आमंत्रित है|

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